नागपुर: नागपुर के यशोधरा पुलिस स्टेशन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। डेढ़ साल पहले रेलवे ट्रैक पर मिले एक अज्ञात शव के मामले में अब एक परिवार ने पुलिस पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि सिर्फ शक के आधार पर उन्हें पिछले एक महीने से रोज़ाना 13 से 14 घंटे तक थाने में बैठाया जा रहा है और कोरे कागज़ों पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं।
मामला करीब डेढ़ साल पुराना है, जब रेलवे पटरी पर एक अज्ञात शव मिला था। इसी केस में पुलिस मोहम्मद यासीन से पूछताछ कर रही है। हालांकि परिवार का दावा है कि पुलिस खुद कह रही है कि यासीन इस मामले में आरोपी नहीं हैं, इसके बावजूद लगातार घंटों पूछताछ और दबाव बनाया जा रहा है।
पीड़ित परिवार के अनुसार उन्हें केरल से नागपुर लाकर पूछताछ की जा रही है। उनका कहना है कि इस दौरान परिवार के छोटे-छोटे बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ित मोहम्मद यासीन का कहना है कि यदि वह आरोपी नहीं हैं तो रोज़ाना इतने लंबे समय तक थाने में बैठाकर पूछताछ करना और दबाव बनाना समझ से परे है।
इस पूरे मामले को लेकर नागपुर की चैतन्य सामाजिक संस्था के अध्यक्ष हाफिज साबरी ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति आरोपी नहीं है, तो इस तरह लगातार थाने में बैठाकर पूछताछ करना और कोरे कागज़ों पर हस्ताक्षर करवाना कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
रमजान के पवित्र महीने में परिवार पर आई इस परेशानी ने कई कानूनी और मानवीय सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है।


